आंवला (Amla) की खेती कैसे करें


आंवला की खेती कैसे करें | Aavle ki kheti kaise kare

आंवला विटामिन सीसे भरभूर प्रकृति का ऐसा  स्रोत है।   जो की हर तरह के रोगों को हमसे दूर करने के लिए एक  बहुत ही गुणकारी ओषधि  की तरह है  जिसका उपयोग लगभग सभी तरह की आयुर्वेदिक  ओषधियो  में किसी ना किसी रूप में इस्तमाल किया जाता है
आंवला से  बनने वाले  उत्पादों की मांग दिन पे दिन बढ़ने से इसकी खेती करने में भी किसानो का रुझान बढ़ा है
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कम लागत में आधिक मुनाफा देने वाली आंवला की खेती के विषय कम जानकारी होने के कारण बहुत से किसान इससे  अनभिज्ञ रहते है
 ये जानकारी उन्ही किसानो को ध्यान में रखकर तेयार की गई है आइए जाने आंवला की खेती कैसे करें उससे पहले हम  आंवला खाने के क्या क्या  फायदे  है 
आंवला खाने के फायदे :-
आयुर्वेद में  अमृतफल कहे जाने वाला  आंवला सदियों पहले चरक ऋषि द्वारा इसके विषय में ज्ञान हमे बताता है की ये एक ऐसा  फल है जो हमे  सदेव ही जवान और बलवान बनाये रखता है  इसके साथ ही आंवला विटामिन सी’,आयरन,  पोटासियम, कार्बोहायड्रेट, फाइबर, प्रोटीन्स, विटामिन्स ’,’बी काम्प्लेक्स,मैग्नीशियम,  से भरपूर है
किसी ना किसी रूप में आंवला का नियमित सेवन हमारी आँखों ,त्वचा ,बालो , ,श्वास रोग, कब्ज, हृदय रोग,  में बहुत  ही लाभदायक है
इसके अलावा आंवले से बनने वाले उत्पादों की बात की जाये तो इससे च्यवनप्राश, त्रिफ़ला चूर्ण, आंवला जूस , आंवला मुरब्बा , आंवला कैंडी ,आरोग्यवर्धनी वटी, रक्तशोधकवटी,  जैसी कई औषधियों के साथ ही इससे तेल, हेयर डाई तथा शैम्पू  बनाने में बहुत आधिक उपयोग किया जाता है  जो की बताता है की इसकी खेती से किसानो को अच्छी आमदनी होना तय  है
आइए तो जाने कैसे करे  आंवला की खेती
जलवायु :-
आंवला की खेती लगभग सभी तरह की जलवायु में की जा सकती है परन्तु इसके अनुकूल सबसे उत्तम जलवायु की बात करे तो शुष्क जलवायु को माना जाता है  इस तरह आंवला की खेती उष्ण जलवायु के साथ उपोष्ण जलवायु  में की जा सकती है 
आंवला की खेती  में भूमि  का चयन :-
आंवला की खेती  रेतीली भूमि को छोडकर सभी तरह की भूमि में की जा सकती है  यहाँ तक की ऐसी भूमि जिसका की PH मान 9.0  तक हो में भी आंवला की खेती की जा सकती है

Amla (Indian Gooseberry) (आंवला की खेती) 

ki Kheti kaise kare

 

 

आंवले को  कलमी पौधों द्वारा लगभग 8×8 मीटर के अंतर पर 60×60 सेंटीमीटर के गड्ढों खोद कर उनमे 15-20 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद मिला दी जाती है  और  इसके साथ ही गड्डो को कीटों से बचाव के लिए अच्छी  तरह का कीटनाशक का उपयोग किया जाता है
आंवला की  प्रजातियाँ :-
आंवला के सबसे उन्नत प्रजातियों में निम्न है
·       चकिया ,
·       बनारसी
·       फ्रांसिस ,
·       कृष्ण ,
·       कंचन नरेंद्र आंवला 5,4,7
·       गंगा ,
आंवला के पोधो की रोपाई :-
आंवले  को  हम पोधो को बीज  लगाकर या पहले से रोपित पोधो को  गमले से निकाल कर  पहले से तेयार गड्डो  में लगा लेते है
खाद और उर्वरक :-
आवंला की फसल में  खाद और उर्वरक की बात की जाये तो ये  हर  वर्ष 100 ग्राम नाइट्रोजन

60 ग्राम फास्फोरस

 75 ग्राम पोटाश

 प्रति पेड़ के हिसाब से देना होता है जो की ये   मात्रा हर वर्ष  इसी मात्रा में बढ़ा दी जाती है

आंवला के पोधो की सिचाई :-
आंवला में सिचाई  गर्मियों में जहा 2 बार की जाती है वही सर्दियों में ये सिचाई केवल एक बार ही करनी होती है  इसके अलावा बारिश ख़त्म होने के बाद पोधो के आसपास बाडा बना दिया जाता है ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे 

इस तरह उचित देखरेख कर एक पौधे से करीब  हम 2.5 से 3.00 कुंतल  तक फल आसानी से  प्राप्त कर सकते है,  जो की प्रति हैक्टर 150 से 200 कुंतल   की दर से होता है  

 

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