केले की खेती कैसे करे


केले की खेती कैसे करे 

 

दुनियाभर में सबसे पुराने फलो में केले का नाम आता है
जो की सम्पूर्ण भारत में बड़ी ही आसानी से हर जगह उपलब्द
हो जाता है 4000 साल प्राचीनतम इस फल के स्वादिष्ट पौष्टिक पाचक गुणों के कारण ये हर उम्र का पसंदीदा  फल  है
मोसम की अनिशिचता  से आज खेती जहा  कुछ किसानो के लिए घाटे का कार्य बनता  जा रहा है तब ही देश के कई किसानो ने केले की खेती की बारीकियो  नयी तकनीको और   वैज्ञानिक पहलु से नये आयाम गढ़े है 

kele ki kheti kaise kare

आज हम केले की खेती  कैसे करे  इस पर 
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विस्तार से चर्चा करेगे इससे पहले आइए जानते है केले खाने के फायदे !!
केले खाने के फायदे :-
हमे वजन बढ़ाना हो या  तुरंत पोजिटिव  ऊर्जा चाहिये  दोनों ही काम केले से अच्छा कोई फल नहीं कर सकता है
केले में भरपूर कार्बोहाइड्रेट्स  और विटामिन और प्राकृतिक फाइबर पाया जाता  जो की हमारे  स्वास्थ के लिए एक उत्तम आहार की तरह है
केले से बनने वाले  उत्पाद :-
केले का उपयोग फलो  के साथ साथ  कई तरह के  खाध्य सामग्री को बनाने में भी किया जाता है जिनमे की  केला चिप्स,  पापड,  जूस, मिटाईयो  में  और कई तरह के आयुर्वेधिक दवाइयों में केले का उपयोग किया जाता है
जिससे की इसकी मांग हमेशा बाजार में बनी रहती है जिससे किसानो द्वारा केले की खेती करना अच्छा विकल्प है

banana ki kheti kaise kare

भूमि का चयन :-
केले के लिये जीवाश्म युक्त  दोमट या मटियार दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है 
केले  के विषय में एक सूत्र कहा जाता है की खान पान केला पानी का चेला से अर्थ ये की इन तीनो को जल की बहुत आवश्यकता होती है
जल के साथ ही हमे केले की फसल में ये भी ध्यान रखना है की मिट्टी  में जल का निकास उचित तरह से होता हो और आधिक जल का भराव ना हो ऐसी मिट्टी में ही केले की खेती करना चाहिए एवम मिट्टी का PH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए
केले की किस्मे :-
भारत में केले की बहुत सी किस्मे पायी जाती है जिनमे  मुख्य रूप से फलो की प्रजातियाँ निम्न है
·      हरी छाल,
·      सालभोग,
·      अल्पान
·      ड्वार्फ कैवेंडशि,
·      रोबस्टा, नेन्ट्रन,
·      लाल केला,
·      नाइअली,
·      मोन्थन पूवन,
इसके अलावा अगर हम सब्जी बनाने वाली  किस्मों  की बात करे तो वो निम्न है –
·      कोठिया,
·      बत्तीसा,
·      मुनथन
·      कैम्पिरगंज

banana plant information in hindi

 

केले के पेड़ को कैसे लगाये :-
केले के पेड़ को उगाने का सही तरीका  इन्हें सीधे ही पोधे सहित लगाना होता है  जो केले के पेड़ ख़राब हो चुके है  उन पर इन्हें लगाया जा सकता है
 केले के पेड़ को लगाने में ध्यान देने योग्य बाते   :-
1.   केले का कोई बीज नहीं होता है
2. केले के पेड़ को  लगाने के बाद पर्याप्त पानी   मिलता रहे
3. छाव  मिलना पेड़ को बहुत जरुरी है
खेत की तैयारी :-
केले की खेती के  लिए सबसे पहले हमे मिट्टी की अच्छी तरह जुताई कर भूमि को भुरभुरा कर समतल किया जाता है 
केले के लिए गड्डे खोदे :-
केले की फसल के लिए पोधो की रोपाई हमे किस्मो के अनुसार करना होती है जिनमे सब्जी वाली किस्म में 50cm  लम्बा ,चोड़ा और इतना ही गहरा गड्डा  खोद कर फिर उसमे रोपाई की जाती है इस तरह कतार में लगे पोधो की एक दुसरे से  दुरी 2 से 3 मीटर की रखते है
इसके अलावा अगर  हरे छाल की किस्म की रोपाई करना है तो हमे 1.5 मीटर लम्बा  और इतना ही चोड़ा गड्डा खोदते है 
बरसात शुरू होने के पहले 15 दिन में ही हम गड्डो को कुछ इस तरह खोद लेते है इनमे अच्छी तरह धुप लग सके और गड्डो में  अच्छी किस्म के  सेहतमंद केले की पौध 150-200 ग्राम नीम की खली, 250-300 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और  20-25 किग्रा सड़ी हुयी गोबर की खाद से गड्डे को भर देते है
सिचाई :-
केला जो की पानी की ही मुख्य  फसल है अत: हमे इसमें सिचाई का खास ध्यान रखना होता है जिससे की सिचाई बहुत आधिक और  ना ही बहुत  कम हो ! सिचाई सिमित मात्रा में ही हो इसके लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम से करना फायदेमंद होता है 

Kele ki Vaigyanik Kheti Jankari

खाद एवं उर्वरक का प्रयोग :-
 केले की फसल में अगर खाद एवं उर्वरक की बात करे तो ये प्रति पौधा करीब  
 300 ग्राम नत्रजन :- नत्रजन के 300 ग्राम को 5 भागो में  बाटा जाता है जो की  अगस्त, सितम्बर ,अक्टूबर तथा फरवरी एवं अप्रैल में देना होता है
 100 ग्राम फास्फोरस :- जिसमे की फास्फोरस  को 2 भागो दिया जाता है पहला भाग पौध रोपण के समय तथा और बचा हुया दूसरा  भाग रोपाई के बाद देना होता है
 300 ग्राम पोटाश :-  इस तरह पोटाश को भी तीन भागो में बाँटकर सितम्बर ,अक्टूबर एवं अप्रैल में देना होता है

 केला के प्रमुख रोग एवं निदान

1.  चित्ती रोग या सिगाटोक रोग :-
केले की फसल में होने वाला ये एक मुख्य रोग  है जिसमे  की  केले की पत्तियां नष्ट होती है  जिससे की हमे फसल का उत्पादन कम मिलता है
इस रोग के होने पर हमे  ताम्रयुक्त दवा फाइटोलान, क्यूपरामार , ब्लूकापर या ब्लाईटाक्स – 50 का 0.3 प्रतिशत की दर से छिड़काव करें।  ये छिडकाव करीब एक हेक्टर के लिए 1000 लीटर द्रव उत्तम रहता है
2.गुच्छशीर्ष रोग:-
केले की फसल में होने वाला  ये एक विषाणु द्वारा होने वाला  एक खतरनाक रोग है जिसमे की पौधों के शीर्ष पर पत्तियों का गुच्छा बन जाता है इसलिए इसे  गुच्छशीर्ष रोग कहते है
इस रोग की रोकथाम के लिए  बिना विलम्ब किये मेटासिसटॉक्स (0.1 से 0.5) दवा का छिड़काव करना चाहिए 
इसके अलावा भी केले में अन्य तरह के किट रोग होते है  जो की केले के उत्पादन को कम कर सकते है
केले को पकाने का तरीका या केला पकाने की विधि :-
केले को पहले जहा  कैल्शियम कार्बाइड से पकाया जाता था जो की हमारे स्वास्थ के लिए बहुत ही नुकसानदायक होता था  इसी बात को देखते भारत में इस पर प्रतिबंध लगने के बाद अब केले को पकाने का नया आधुनिक वैज्ञानिक तरीका इस्तमाल किया जाता है है जिसमे की  कोल्ड स्टोरेज में एथिलीन गैस की मदद से ये कार्य किया जाता है जो की  केले को पकाने का एक सुरक्षित  तरीका है
केले की खेती कैसे करे  पूरी जानकारी !!
केले की खेती कर के किसान भाई ना केवल हजारो ,लाखो बल्कि करोडो रूपये तक  कमा सकते है अपनी मेहनत से ये   करिश्मा  करके दिखाया है महाराष्ट्र के  जलगांव के  किसानो ने
उम्मीद करते है  मित्रो ये जानकारी आपके लिये उपयोगी रही होगी !! धन्यवाद ..!

7 thoughts on “केले की खेती कैसे करे”

  1. हरित मोहन जी केले के पौधों की रोपाई एक जुलाई से 20 जुलाई के बीच करना सबसे सही मानाजाता है, इसके बाद रोपाई करने से पैदावर कम हो सकती है।’’

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  2. sir ye mera whatsup no hai 9368335138 pls contact me maine kele ka 5000 plant laga rakha hai 2 years ho gsye hsi mujhe kuch nahi mila pls solve the problem contact me on whstsup plsssss

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  3. केले कीे खेती , ट्रेनिंग और टिशू कल्चर पौधे के लिए संपर्क करें हमारे यहां सभी प्रकार के केले के पौधे उपलब्ध हैं बुक करने के लिए अभी कॉल करें 08052123559

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  5. G9 किस्म की खेती के लिए मार्ग दर्शन कर सकते हैं??

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