तरबूज और खरबूज की खेती कैसे करे


तरबूज और खरबूज की खेती  कैसे करे    

तरबूज़ ग्रीष्म ऋतु में आम के बाद सबसे आधिक खाया जाने वाला एक स्वादिष्ट, सस्ता, और स्वास्थ वर्धक  फल  है
तरबूज और खरबूज को  फल के अलावा इसके बीज भी उतने ही स्वास्थ वर्धक  होते है
तरबूज और खरबूज की अच्छी पैदावार को देखते हुए किसान अब परम्परागत खेती 
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को छोड़ कर तरबूज और खरबूज की खेती का चुनाव कर रहे है परन्तु इसकी खेती के  विषय में जो किसान  अनभिज्ञ है  उनके लिए इसकी सही जानकारी ही अच्छी पैदावार  में अहम् योगदान देती है  
आइए तो जाने कैसे करे तरबूज और खरबूज की खेती 

Tarbuj Kharbuja ki kheti kaise kare


तरबूज और खरबूज की खेती  बीज द्वारा लगा कर और  नर्सरी से पोधे को लाकर भी रोपाई की जाती जिससे हमारा समय बच जाता है  परन्तु हमे इनकी जड़ो  के नाजुक होने पर इसे लगाते समय विशेष  ध्यान  रखना होता है
भूमि :-
तरबूज और खरबूज की खेती  गर्मी के मोसम में  होने के कारण इसके लिए  हमे ऐसी भूमि की  आवश्यकता होती है जिसमे की नमी बनी रहे   बलई दोमट मिट्टी  और रेतीली  भुरभुरी भूमि जिसका की ph मान  6 से 7 के बीच हो
खेत की तेयारी :-
खेत की 2-3 बार अच्छी तरह जुताई कर  क्यारियां बना कर तेयार कर खेत में गोबर की खाद आवश्यकता अनुसार मिला  लेते है  
 तरबूज और खरबूज के  फलने फूलने लिए  हमे 25 से 30 सेंटीग्रेड तापक्रम होना आवश्यक माना जाता है
बुवाई का समय :-
तरबूज और खरबूज की बुवाई का समय  नवम्बर से मार्च तक का  होता है 
जो की पहाड़ी क्षेत्रो में अप्रैल तक भी इसकी बुवाई की जा सकती है और उत्तर भारत के मैदानी इलाको  में फरवरी से अप्रैल तक  ये किया जा सकता है
और आधिक गर्म क्षेत्रो में छाव करके नवम्बर – दिसम्बर के महीने में ही करना  होता है
बीज की बुवाई करने से पहले हमे बीज का अंकुरण अच्छी तरह से हो इसके लिए हमे अच्छी किस्मो और बीज की  गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए  कार्बेंडाजिम, मैंकोजेब या थीरम से  बीजशोधन  करना जरुरी होता है 
खाद और   उर्वरक :-
तरबूज और खरबूज  ये अपने आप में ऐसी फसले है जो  की भरपूर पैदावार  देती है एक हेक्टेयर में तक़रीबन 60-70 टन और अगर उचित खाद और  उर्वरक  से भूमि का पोषण किया जाए तो ये आकड़ा 95 टन  से भी आधिक  पाया जा सकता है
इसके लिए विशेषज्ञ  30 से 40 टन देशी खाद प्रति हेक्टेयर देने की सलाह देते है जिससे की भूमि भुरभुरी बनी रहे  और पोधो में पर्याप्त नमी बनी  रहे
इसके अलावा 40 किलो .ग्राम फास्फोरस, 60 किलो पोटाश , एवम  फफूंदीजनित रोगों से बचाव के लिए 4 किलो .ग्राम सल्फ़र  प्रति हेक्टेयर  देना होता है  ध्यान  रहे ये सभी खाद और उर्वरक मिट्टी के परिक्षण  के बाद  भूमि की  उर्वरक  क्षमता के अनुसार तय करे
सिचाई :-
पानी से भरपूर तरबूज औरखरबूज की खेती में सिचाई का अहम् योगदान है जिनमे हमे  सिचाई करते रहना चाहिए
ध्यान रखे खेत में सिचाई करते समय कही भी जल का ठहराव ना हो  और फलो के पकने की अवधि में  सिचाई रोक देनी चाहिए
किट रोग :-
कद्दू वर्गीय फसलो में होने वाले  सबसे मुख्य  फंफूदजनित रोग होते है  जिनका की उपचार  फफूंदीनाशी कीटनाशको से करने में विलम्ब नहीं करना चाहिए क्योकि  ये  रोग  फल को बढ़ने से रोकता है

1 thought on “तरबूज और खरबूज की खेती कैसे करे”

  1. We wish to do farming of Water Melon in Cachar distt of Assam. Presently the temp is 14 deg & 22.5 deg. By March 1st week the temp will be 222 deg and 28 deg. The soil is sandy loam Blak or Muddy color soil. Land is available on flat surface as well as tillahs. Can u suggest whether it will be profitable in our conditions. If so what quality of seed we should buy.

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