गन्ने की खेती कैसे करे


गन्ने की खेती की जानकारी
विश्व में  गन्ना की खेती में सबसे अग्रणी देशो में शुमार भारत में न केवल इसकी खेती से किसानो की आमदनी  बढ़ी है वरन ये  असख्य लोगो की जीविका चलाने में भी अप्रयक्ष रूप से उतना  ही सहयोगी है आइए तो आज जाने विस्तार  से  गन्ने की खेती की जानकारी !!

Ganne ki kheti kaise kare

  गन्ने के  उत्पादन  में अग्रणी   देशो की बात की जाये  तो उनमे भारत का दूसरा स्थान है
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गन्ने के  उत्पादन  में अग्रणी देश
ब्राज़ील
भारत
चीन
श्यामदेश
पाकिस्तान
मेक्सिको
कोलंबिया
ऑस्ट्रेलिया
अर्जेण्टीना
संयुक्त राज्य

गन्ने के रस के फायदे / benefits of sugarcane juice :-

गन्ने के रस को पीने से जहा हड्डियाँ मजबूत होती है वही ये शरीर में खून के बहाव को भी सुचारू रूप से चलाने में भी मददगार होता है आइये  जाने क्या है  गन्ने के रस को पीने  के  फायदे

1.   गन्ने के रस में मौजूद ग्लूकोज की  वजह से इसे पीने से शरीर में  तुरंत ही एनर्जी आ जाती है  और ये एक तरह से एनर्जी बूस्टर की तरह काम में आता है

2.  गन्ने के रस में भरपूर मात्रा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स  होने से इसे नियमित रूप से पीने से शरीर की रोगों से लडने  की क्षमता बढती है

3.   गन्ना का रस में कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नेशियम  होने से शरीर को इसे पीने से केंसर जैसे रोगों से बचाव होता है

4.   गन्ने का रस पीने से शरीर का पाचन ,लीवर और किडनी के लिए भी इसका सेवन करना फायदेमंद होता है

5.  मुंह से संबंधित रोगों जैसे दांतों में सड़न, सांसों की दुर्गंध जैसे रोगों एवंम त्वचा सबंधी रोगों   में भी इसका सेवन   फायदेमंद माना जाता है

 

sugarcane farming in hindi | गन्ने की खेती कैसे करे

गन्ने की बुवाई का समय :-
15 फ़रवरी से 15 मार्च एवंम अक्टूम्बर  से नवंबर के मध्य में भी गन्ने की बुवाई की जा सकती है

गन्ने के साथ में ली जाने वाली अन्तवर्तीय फसल :-

गन्ने के साथ में मुंग,उड़द ,बेल वाली फसले जैसे तरबूज , खरबूज घिया ,गिल्की, इसके अलावा टमाटर की फसल भी li जा सकती है
 गहरी जुताई और खरपतवार का विशेष ध्यान रखना है 
 
बीजो का चयन :-
साल भर की जाने वाली  गन्ने की खेती की 2 तरह की किस्मे होती है 
जिनमे एक जल्दी और एक  देर से पकने वाली फसले है
देश के पश्चिमी क्षेत्र में गेंहू की कटाई के बाद भी गन्ने की खेती की जाती है
कोशिश करे देशी खाद का प्रयोग करे
बीज लगाने से पहले उन्हें फफूंद नाशक  दवाओं और  जीवाणु खाद से अच्छी तरह उपचारित  करने के
गन्ने में सिचाई की प्रबंधन :-
धान की फसलो की तरह ही गन्ने में भी सिचाई की भरपूर व्यवस्था करना आवश्यक है  गन्ना में ड्रिप सिचाई  विधि से सिचाई  करना एक अच्छा तरीका है
भूमि :-
बहुत ही उपजाऊ और पोषक तत्वों  युक्त हल्की दोमट  मिट्टी  में ही गन्ने की खेती करना चाहिये
हवा से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए गन्ने की बुवाई  पूरब से पश्चिम में करे एवंम समय समय पर मिट्टी को गन्ने पर लगाकर इसे मजबूती दे
गन्ना बोने की विधि :-
गन्ने को बोने की सामान्य विधि के अलावा इन दिनों गन्ने को बोने की  गन्ने की ट्रेंच विधि सबसे  आधिक प्रचलित है आइए जाने विस्तार से क्या है गन्ने की ट्रेंच विधि
गन्ने की प्रजाति /किस्मे :- :-
गन्ने की प्रजाति में सबसे मुख्य रूप से को-0238,0239 कोशा 8436,8432  है इनमे  गन्ने की प्रजाति 0238 किसानो  के साथ साथ मिल मालिको के लिए भी फायदेमंद है

गन्ने की ट्रेंच विधि :-

गन्ने की बुवाई की सामान्य विधि से आधिक पैदावार  लेने के लिए इन गन्ने की ट्रेंच विधि आधिक प्रचलित  है इस विधि में हम 20 सेमी गहरी और करीब 30 से.मी. चोडी एक नाली या खायी बना दी जाती है   जिसे एक विशेष प्रकार के औजार यानी ट्रेंच ओपनर से बनाया जाता है इसे ही गन्ने की  ट्रेंच विधि कहते है  इस तरह एक नाली से दूसरी नाली की दुरी करीब 120 से.मी . तक रखी जाती है  
गन्ने की ट्रेंच विधि में बीज की मात्रा :- गन्ने की ट्रेंच विधि में हमे सामान्य विधि से ज्यादा बीज लगता है इसमें 80 कुंतल तक बीज प्रति हेक्टेयर तक लगता है
एक गन्ने के टुकड़े से दुसरे गन्ने के टुकड़े की दुरी करीब 10 से.मी. तक  रखी जाती है  इस तरह 1 मीटर की नाली में 10 टुकड़े हमे लगते है ट्रेंच विधि में आधिक से आधिक 4 से.मी. तक मिट्टी ऊपर चढाई जाती है जो की गन्ने की सामान्य विधि में  मिट्टी का जमाव 15 से 20 से.मी . तक का होता है
गन्ने की ट्रेंच विधि में खाद उर्वरक :-  इस विधि में हम ट्रेंच में ही 180 किलोग्राम  नाइट्रोजन ,80 किलो फास्फोरस और 40 किलो पोटाश  की आवश्यकता होती है जिसमे हमे
180 किलोग्राम  नाइट्रोजन में से एक तिहाई मतलब  60 किलो नाइट्रोजन और पोटाश और फास्फोरस की पूरी मात्रा लेते है    हम ट्रेंच बनाते समय अच्छी तरह से मिला लेते है
इस विधि में सीधे नाली में सिचाई की जाती है जिससे फसल में लगने वाले अनावश्यक खरपतवार के अलावा सिचाई भी हमे कम मात्रा में करनी होती है जो की एक तरह से फसल की लागत को कम कर उत्पादकता को बढ़ाने में विशेष सहयोग करती है  इसके साथ ही  दो ट्रेंच के बीच की  खाली भूमि में में हम अन्य फसल की बुवाई कर और अतिरिक्त  मुनाफा कमा सकते है  इस तरह हम ट्रेंच विधि से गन्ने की  1200-2400 कुंतल  प्रति हेक्टेयर  तक   पैदावार  ले सकते है।

    गन्ना काटने की मशीन :- शुगर केन हार्वेस्टर मशीन या गन्ने काटने की मशीन जो की गन्ने की फसल की कटाई करने और छिलने  में लगने वाले समय को बहुत हद तक कम कर  देता है  जो की  एक घंटे में करीब 15 टन तक गन्ना काटा जा सकता है।

गन्ना काटने की मशीन की कीमत तक़रीबन 95 लाख से 1 करोड़  रूपये   तक होती है
गन्ने की खेती से लाभ :-

  अच्छी प्रजाति के गन्ने की बुआई कर  एक एकड़ खेत में डेढ़ लाख रुपये  तक का गन्ना पैदा किया जा सकता हैं। इस तरह हमे प्रति एकड़ में हमे करीब  25 से 30 हजार रुपये की लागत आती है इसके अलावा गन्ना की खेती में  फसल चक्र अपनाकर जमीन को  और भी आधिक उपजाऊ बनाया जा सकता है



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