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कद्दू की खेती कैसे करे


कद्दू की खेती कैसे करे

कद्दू जिसे की पॅम्किन (pumpkin), सीताफल, कुम्हड़ा, काशीफल, मीठा कद्दू, चपन कद्दू जैसे नामों से भी जाना जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर ऐसी एक फसल है जो की बिना किसी कोल्ड स्टोरेज के लम्बे समय तक रखी जा सकती है पहले जहा कद्दू केवल गाँवो में किसी शादी जैसे विशेष आयोजन पर बनाया जाता था आज वो किसानो की मुख्य फसल बनता जा रहा है
तो आइए जाने कद्दू की खेती कैसे करे उससे पहले जान लेते है कद्दू में मोजूद गुणों को


कद्दू खाने के फायदे :-

कद्दू ना केवल हमारी सब्जियों बल्कि खास तरह
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मिठाइया जैसे आगरा की प्रसिद्ध मिठाई
पेठा हो या फिर कद्दू की खीर ऐसे कई व्यंजन है जो की कद्दू से बनाये जाते हो

कद्दू को खाने के फायदे की बात जाये तो ये इसमें मोजूद बीटा केरोटीन है जो की हमारे शरीर के लिए और इसके बीज में मोजूद विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर शरीर में इनकी कमी को पूरा करता है

जलवायु
कद्दू की खेती के लिए हमे शीतोष्ण और समशीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है जिसमे की तापक्रम 18 से 30 डिग्री से.गे. के मध्य में हो हमारे यहाँ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार असाम, , तमिलनाडु, कर्नाटक, उड़ीसा तथा पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से कद्दू की खेती की जाती है |

kaddu ki kheti kaise kare

भूमि :-
कद्दू की खेती के हमे PH मान 5.5 से 6.8 वाली हलकी दोमट मिट्टी चाहिए जिसमे की जल निकास अच्छी तरह हो
बांग्लादेश में कद्दू की खेती बनी वरदान :-
दुनिया भर में ऐसे बहुत से क्षेत्र है जहा हमेशा ही ही बाढ़ का का खतरा बना रहता है उन्ही में से एक देश है बांग्लादेश जहा की भूमि पर बाढ़ की वजह से खेत में बाढ़ का पानी भर जाता और मिट्टी में रेत भर जाती थी जो की किसानो के लिए एक चिंता का विषय था परन्तु अब वहा की भूमि पर भी कद्दू की खेती कर अच्छी पैदावार की जा रही है
कद्दू की उन्नत किस्मे :-
· पूसा विशवास,
· पूसा विकास,
· अर्का चंदन
· पूसा हाइब्रिड-1
· अर्का सूर्यमुखी
· कोयम्बूर 1
इसके अलावा कुछ और विदेशी किस्मे है जिनमे की पैटीपान , गोल्डन कस्टर्ड, बतरन्ट, ग्रीन हब्बर्ड , गोल्डन हब्बर्ड , जैसी मुख्य रूप से है
कद्दू की बुवाई का समय :-
कद्दू की बुवाई हम गर्मियों और बरसात दोनों मोसम में कर सकते है गर्मियों में जहा मार्च और फरवरी में कर सकते है वही बरसात में कद्दू की बुवाई हम जून – जुलाई में कर सकते है वही अगर हम नदियो के आस पास किनारों के क्षेत्रो की बात करे तो इसकी खेत दिसम्बर के महीने में किये जाने की सलाह दी जाती है
बुवाई से पहले खेत में 3-4 बार अच्छी तरह पहले जुताई कर मिट्टी को भुर भूरा कर लिया जाता है
उर्वरण व खाद :
खेत की तैयारी के समय में ही हमे कद्दू की फसल में चार उर्वरक मिलाना है जिनमे की सबसे
· पहला है 15-20 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद जो की सबसे अहम् है हर कद्दू वर्गीय सब्जियों के लिए
· दूसरा हमे 80 कि.ग्रा. नत्रजन को 2 भागो में प्रयोग में लाना है
· 50 कि.ग्रा. फास्फोरस
· 50 कि.ग्रा. पोटाश की आवश्यकता होती है।
सिचाई की आवश्यकता हमे कद्दू में बहुत ही कम पड़ती है अगर हमने खरीफ के मोसम में बुवाई की हो तभी हमे इसकी सिचाई पर ध्यान देना है
निसंदेह कम लागत में अच्छी फसल के रूप में कद्दू की खेती करना सबसे बेहतर विकल्प है बस हम इसमें लगने वाले किट रोगों और फफूंदी रोगों से समय रहते रोकथाम और उचित जानकारी लेकर कीटनाशक या नीम की पत्ती का घोल का छिडकाव कर हमारी फसलो से कम लागत मे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है
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