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टिंडे की खेती कैसे करे


टिंडे की खेती कैसे करे
प्रकृति में शीतल और दिखने में गोल मटोल टिंडा जो की बेबी पंपकिन और एप्पल गोर्ड नाम से भी जाने जाता है कुकुरबिटेसी जाती में टिंडा जो की स्वाद में फीका पर गुणों से भरपूर एक ऐसी फसल है जो किसानो के लिए
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भी अच्छी आमदनी की खेती है
आइए विस्तार से जाने कैसे करे टिंडा की खेती
जलवायु :-
टिंडे की खेती के लिए हमे ऐसी जलवायु होनी चाहिए जो की ना तो बहुत आधिक गर्म हो और ना ही बहुत आधिक ठंडी इसके लिए हमे सामान्य गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है जो की प्राय: देश के उत्तर भारत में पाया जाता है
भूमि :-
सभी तरह की भूमि में हम टिंडे की खेती कर सकते है परन्तु अगर सबसे उत्तम भूमि की बात की जाये तो ये भूमि जिवाश्म्युक्त हलकी दोमट मिट्टी जो की जल निकासी में भी अच्छी हो और जिस भूमि का उदासीन पी.एच. मान हो
बुवाई का समय
बारिश से पहले गर्मियों में हम जून-जुलाई। और इसके अतिरिक्त हम फरवरी मार्च में भी टिंडे की खेती की बुआई की जा सकती है।

टिंडे की खेती कैसे करे

एक हेक्टेयर में करीब 5से 6 किलो तक बीज हमे लग जाता है इस तरह समतल क्यारियों या तो डौलियों में हम बीज की बुवाई कर सकते है

जल प्रबंधन :-
टिंडे की फसल में हमे केवल गर्मियों में ही हर 7-8 दिनों में पानी देना होता है एवम वर्षा कालीन टिंडा को लगाने पर हमे उसकी भी आवश्यकता ख़त्म हो जाती
खाद एवं रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग :-
खेत की तेयारी के साथ ही हमे गोबर की खाद तथा अन्य रासायनिक खाद यूरिया तथा अमोनियम फास्फेट को भूमि के अनुसार खेत में तैयारी के समय अच्छी तरह मिलकर डालना चाहिए ।
उन्नत किस्मे :- किसी भी फसल की अच्छी पैदावार के लिए बहुत आवश्यक है की हम उसकी उन्नत किस्मो की ही बुवाई करे टिंडे की उन्नत किस्मे निम्न है –
बीकानेरी ग्रीन ,हिसार चयन 1 ,अर्का टिंडा,टिंडा एस 48 ,एस 22
खरपतवार नियंत्रण:-
अन्य फसलो की तरह ही टिंडे की फसल में भी लगने वाले खरपतवार टिंडे को मिलने वाले पोषक तत्वों में अवरोध उत्पन्न करते है जिनकी निदाई –गुड़ाई कर समय समय करते रहना चाहिये
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