अरबी (घुईया) की खेती कैसे करे


 अरबी  (घुईया) की खेती कैसे करे

 

अकसर कहे जाने वाले तकियाकलाम घुईया के खेत  का मतलब अरबी का  खेत होता है ये जितने कम लोग जानते 
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है शायद   ही उससे भी कम लोग अरबी में मोजूद 
पोषक तत्वों के बारे में जानते होंगे 

अरबी के पत्तो से लेकर ठंड्हल तक हमारे स्वास्थ के लिए ओषधीय की तरह है  जानते है कैसे करे अरबी की खेती
भूमि :- अरबी की खेती के लिये अच्छे जल निकास वाली बुलई दोमट भूमि  जिसका की PH मान 5.5 से 7 हो  अरबी के कंदों के विकास के लिए ऐसी भूमि  उत्तम मानी जाती है इसके अलावा
गहरी भूमि में भी अरबी की खेती  अच्छे से की जा सकती है
जलवायु :-
अरबी की खेती के लिए गर्म और आर्द्र दोनों तरह की जलवायु की आवश्यकता होती है जो  की प्राय: देश के उत्तर भारत क्षेत्र में होती है   इस तरह अरबी की खेती वर्षा और गर्मी  दोनों ही मोसम  में करने का विकल्प हमारे पास होता है
 अरबी की बीज बुवाई :-
 खेत की तेयारी में सबसे पहले अच्छी तरह जुताई कर   मिट्टी  को भुर भूरा करने के बाद खेत को समतल किया जाता है
अरबी के बीज की बुवाई साल में 2बार खरीफ और बरसात में   फरवरी – मार्च और  जून -जुलाई  में की जा जाती है
मध्यम आकार के कंदों का चुनाव करना अच्छे परिणाम देता है बुवाई समतल  क्यारीया बना कर और डोलिया बना कर की जाती है
सिचाई :-
अरबी की गर्मी में की जाने वाली खेती में हमे हर सप्ताह सिचाई की आवश्यकता होती है  जो की वर्षा में हमे सिचाई की आवश्यकता ना के बराबर  होती है
खरपतवार नियंत्रयक :-
सिचाई के साथ ही अरबी की फसल को बर्बाद करने वाले खरपतवारो का समय समय पर निदाई –गुड़ाई करना अत्यंत आवश्यक है
 अरबी में लगने वाले रोगों का उपचार समय रहते करने पर अच्छी पैदावार कर इस फसल से  कम लागत में  बढ़िया आमदनी की जा सकती है
अरबी में लगने वाले झुलसा और  फंफूदजनित बीमारी में 800 ग्राम मैंकोजेब को 400 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करना चाहिए

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