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लहसुन की खेती कैसे करे


                    लहसुन की खेती कैसे करे

मसालों के रूप में उपयोग किये जाने वाले लहसुन अपने विशेष गुणों और स्वाद के कारण भारतीय खाने में इसका सेवन सबसे स्वादिष्ट मसालों के रूप में किया जाता है
कंद रूप में लगने वाली लहसुन की फसल में एक विशेष तरह का तत्व पाया जाता है
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जिसे की एलसिन कहते है और यही तत्व इसके स्वाद को तीखा और इससे आने वाली एक खास तरह की गंध के लिए भी उत्तरदायी है
लहसुन की खेती कैसे करे
जलवायु : – रबी के मोसम में की जाने वाली लहसुन की खेती की जलवायु की बात की जाये तो इसकी लिए ना तो बहुत आधिक ठन्डे और ना ही बहुत आधिक गर्म मोसम की आवश्यकता होती है है इसके लिए हमे प्राय: समशीतोष्ण जलवायु में इसकी खेती करना लाभकारी होता है
लहसुन की खेती के लिए भूमि :-
लहसुन की खेती के लिए हमे जैविक गुणों से भरपूर रेतीली दोमट मिट्टी या बुलई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है जिसका की ph मान 6 -7 हो एवंम जिसमे अच्छी तरह से जल का निकास होता हो लहसुन जो की कंदों की फसल है अत: इसकी पैदावार के लिए बहुत आधिक भारी भूमि में इसकी खेती करने से बचना चाहिये
लहसुन की किस्मे :-
यमुना सफेद 1 (जी-1), यमुना सफेद 2 (जी-50), यमुना सफेद 3 (जी-282), यमुना सफेद 4 (जी-323), एवंम इसके अलावा जी 323, टी 56-4, गोदावरी, श्वेता, आई. सी. 49381, आई. सी.42889 एवं 42860 लहसुन की प्रमुख किस्मे है

खेत की तेयारी :-

लहसुन की खेती की तेयारी की बात की जाये तो इसके लिए हम अच्छी तरह से 2-3 बार जुताई करने के बाद मिट्टी को भुरभुरा कर समतल बनाया जाता है एवंम इसमें भूमि में अच्छी तरह से सड़ी हुयी गोबर की खाद को 500कुंतल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिला दी जाती है इसके साथ हम सिचाई के लिए क्यारिया बना लेते है

लहसुन की बुवाई का सही समय :-
लहसुन की बुवाई का सबसे उत्तम समय अक्टुम्बर मध्य से 15 नवम्बर तक का होता है
लहसुन की बीज बुवाई और बीजोपचार :-
किसी भी फसल में एक स्वस्थ बीज ही एक स्वस्थ पोधे का निर्माण कर सकता है अत: हमे बीज की बुवाई से पहले ये सुनिश्चित करना आवश्यक है की बीज की बुवाई अच्छी तरह से उपचारित बीजो से ही करे एवंम अगर लहसुन के बीजो की बुवाई के तरीके की बात करे तो इसके लिए हमे लाइन से लाइन की दुरी 15 सेंटीमीटर रखते हुए और पोधे से पोधे की दुरी को करीब 10 cm रखना अच्छे परिणाम देता है
लहसुन में खाद और उर्वरक का प्रयोग :- फसल के पोषण के लिए हमे सर्वप्रथम खेत की तेयारी के साथ ही गोबर की सड़ी खाद 20 से 25 टन एवंम 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, और इतनी ही मात्रा में फास्फोरस और पोटाश की मात्रा को रोपाई से पहले प्रयोग में लाते है अंत में लहसुन की बुवाई से करीब 30 से 35 दिन के बाद 20 किलोग्राम नाइट्रोजन को देना होता है
लहसुन में लगने वाले मुख्य रोग /किट एवंम उनका उपचार :-
लहसुन में लगने वाला एक प्रमुख किट रोग है थ्रिप्स जो की धीरे पोधे को सुखा देता है इसके लिए हमे मैलाथियान 50 ईसी या मिथाइल डिमेटान 25 ईसी एक मिलीलीटर प्रति लीटर की डर से खेत में अच्छी तरह से छिडकाव करना चाहिए
इसी तरह लहसुन में लगने वाले दुसरे मुख्य रोग की बात करे तो वो है झुलसा व अंगमारी इस रोग में पोधे की पत्तियों में हल्के सफ़ेद रंग के धब्बे बन जाते है जो की बाद में बेगनी रंग के हो जाते है इस रोग में पोधा धीरे धीरे ख़राब होकर मरने लगता है इस रोग के उपचार की बात की जाये तो इसके लिए हमे कोजेब 0.2 फीसदी या रिडोमिल एमजेड 0.2 फीसदी का अच्छी तरह से घोल बना कर छिडकाव करना चाहिए
इन रोगों के अलावा लहसुन में तुलासिता, ब्लैक मोल्ड, बल्ब रोट नामक प्रमुख रोग है जो की लहसुन को सबसे आधिक नुकसान पहुचाते है जिनका की सही समय पर सही सिचाई ,खाद उर्वरक और बीजो को उपचारित कर प्रयोग में लाना बहुत हद तक लहसुन की अच्छी पैदावार को बढ़ा कर इनमे लगने वाले किट रोगों का अंदेशा कम कर देता है
फसल के पाक जाने के बाद पत्तियों सहित लहसुन की हम छोटीछोटी पूलियां बना कर के ढेर बनाते हैं. ताकि इसमें पानी ना घुसे इसलिए तिरपाल ढक कर सुरक्षित कर देते है और जब कभी बाजार भव अच्छा मिले तब हम इसे बेचने ले लिए बहार निकलते है इस तरह से हम लम्बे समय तक लहसुन को भण्डारित कर रख सकते है
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