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फूलगोभी की खेती कैसे करे


फूलगोभी की खेती कैसे करे

सम्पूर्ण वर्ष भर में की जाने वाली फूल गोभी की खेती किसानो के लिए अच्छे संकेत दे फूलगोभी जो की भारतीय भोजन की एक बहुत लोकपिय सब्जी है। जिसकी उत्त्पति का इतिहास खंगाला जाए तो ये ये हमे इटली के भूमध्यसागरीय क्षेत्र का मिलता है एवंम भारत में आगमन मुगलो के काल में माना जाता रहा है देश में अभी इसका उत्पादन करीब करीब
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6,85,000 टन से भी ज्यादा होता है।

Cauliflower (phool gobhi) ki kheti kaise kare

फूलगोभी खाने के फायदे

फूल गोभी जितनी सब्जी, अचार, और सूप के रूप में स्वादिष्ट है उतनी ही ये गुणों में गुणकारी है फूलगोभी में में जहा भरपूर प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, है वही इसमें विटामिन ’, ‘सीतथा निकोटीनिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व मोजूद है।

प्रति हेक्टेयर 100 से 250 क्विंटल फुल प्राप्त हो जाते है। उपज पौधे लगने के समय के ऊपर निर्भर करती है।

फूलगोभी की खेती कैसे करे

फूलगोभी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु :-

फूलगोभी की खेती देश के सामान्य शीतल स्थानों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में व्यपाक पैमाने पर किया जाता है।

फूलगोभी की खेती की शुरुवात हम जुलाई से शुरू होकर अप्रेल के अंतिम सप्ताह तक कर सकते है

एवंम भूमि की बात की जाए तो फूलगोभी लगभग सभी तरह मिट्टी में की जा सकती है बशर्ते भूमि अच्छी तरह उपजाऊ हो PH. मान 5.5 से 7 मान वाली खास तोर पर दोमट और बुलई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है

फूलगोभी की उन्नत किस्मे :-

गोभी की विभिन्न तरह की किस्मे इसकी बुवाई के समय के अनुसार अलग अलग होती है जो की निम्न है

  • · अगेती किस्में

अर्ली कुवारी,

अर्ली पटना,

पन्त गोभी- 2,

पन्त गोभी- 3,

पूसा दिपाली

पूसा कार्तिक,

पूसा अर्ली सेन्थेटिक,

पटना अगेती,

  • · मध्यमी किस्में

नरेन्द्र गोभी 1,

पंजाब जॉइंट पन्त शुभ्रा,

इम्प्रूव जापानी,

हिसार 114, एस-1

,अर्ली स्नोबाल,

पूसा हाइब्रिड 2,

पूसा अगहनी,

  • · पछेती किस्में

पूसा स्नोबाल 2,

पूसा के 1स्नोबाल 16,

पूसा स्नोबाल 1,

दानिया, स्नोकिंग,

पूसा सेन्थेटिक,

विश्व भारती,

बनारसी मागी,

जॉइंट स्नोबालढ्ढ

फूलगोभी की खेती के लिए खेत की तेयारी :-

फूलगोभी की खेती के लिए भी भूमि की तेयारी भी अन्य फसलो की तरह ही सबसे पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने होता है इसके बाद 2-3 कल्टीवेटर से भूमि को समतल और मिट्टी को अच्छा भुरभुरा कर लिया जाता है

जिससे की मिट्टी में जल का भराव कम से कम हो और जल निकास अच्छी तरह से हो !

खाद और उर्वरक

फूल-गोभी के लिए भूमि तैयार करते समय हमे करीब 60 से 70 टन प्रति हेक्टेअर के हिसाब से गोबर की खाद को भूमि में अच्छी तरह मिला कर देना चाहिए।

और अन्तिम रूप से क्यारी की तेयारी करते समय 45 कि०ग्रा० फास्फेट 50 से 60 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेअर की दर से नाइट्रोजन की दो अलग अलग खुराकें दी जाती हैं,

जो की हमे पहली रोपाई के 15 दिन बाद और दूसरी पहली दी गई खुराक के लगभग 1 महीने के बाद दोनों पंक्तियों में 5 से 7.5 सें०मी० गहराई तक इसका उपयोग करना होता है फिर इसके बाद मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए

इसके अतिरिक्त फ़सल की बढवार हमे कम लग रही हो तो कीटनाशी के साथ ही एक प्रतिशत की दर से यूरिया का छिडकाव अच्छे परिणाम देता है

बीज बुवाई :-

बीजो एवंम भूमि को अच्छी तरह से शोधित कर 500 ग्राम तक प्रति हैक्टर के हिसाब से नर्सरी में तेयार की जाती है

60 से 120 दिन में लगने वाली फूलगोभी से प्रति हैक्टर में 300 से 400 कुन्तल फसल का उत्पादन पाया प्राप्त किया जाता हैI

फूल गोभी की खेती से ऐसे कमाया जा सकता है लाखो में !😀

उन्नत बीजो और मोसम के अनुकूल रहने पर फूल गोभी की खेती से तो हम अच्छी खासी आमदनी कर ही सकते है परन्तु इसके अलावा फूल गोभी की खेती से हम इसके बीज तेयार कर भी लाखो में कमाया जा सकता है ! फूल गोभी के बीजारोपण से लेकर बीज तैयार होने में लगने वाला कुल समय छह महीना का होता है. इस बीच में जब फूलगोभी बाजार में बिक्री के लिए आती है उस समय में फूल गोभी का बीज तेयार किया जा सकता है इस तरह से फूल गोभी की खेती के साथ ही हम इसके बीज उत्पादन में अच्छा मुनाफा कर सकते है जो की कई जागरूक किसान कर भी रहे है !

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