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बैंगन की खेती कैसे करें


बैंगन की खेती कैसे करें

गुणों में भले हीबैंगन Brinjal (भंटा) को कमतर आका जाता रहा हो पर स्वाद में अपने आप में एक खास स्थान रखने वाला बैंगन या भंटा की खेती किसानो के लिए हमेशा से पसंदीदा खेती रही है

Brinjal(Began) ki kheti kaise kare

बैंगन के विषय में कई लोगो का इसको बेगुण मानना है एवंम इसको खाने को कोई भी फायदा नहीं है जो की पूरी तरह गलत धारणा है आइए आज हम जाने

बैंगन या भंटा की खेती कैसे करे और इसको खाने के क्या क्या फायदे है

बैंगन खाने के फायदे :-

बैंगन जो की विटामिन A,विटामिन B1, B2, B3, पोटेशियम ,फाइबर्स

कैल्शियम और लौहतत्व से भरपूर होता है जिसमें की केंसर जैसे रोगों के लिए इसमें मोजूद फाइबर्स कोलोन कैंसर की स्थिति में बहुत गुणकारी है

बैंगन की खेती की फ़सल में अच्छी किस्म की संकर या हाईब्रिड किस्मो का चयन कर उन्नत उपज पायी जा सकती है

आइए जाने बैंगन की उन्नत किस्मे :-

लम्बे बैंगन की उन्नत की किस्मे :-

  • आजाद क्रांति,

  • पूसा पर्पिल लांग,

  • पूसा क्रांति

गोल बैंगन की उन्नत संकर ( हाईब्रिड) किस्मे :-

  • आजाद हाइब्रिड,

  • पूसा हाइब्रिड-5,

  • पूसा हाइब्रिड-6,

  • सुप्रिया,

  • अर्का नवनीत एवं सुफल


बैंगन की खेती के लिए उपयुक्त भूमि :-

बैंगन की खेती के लिए हमे अच्छे जल निकास वाली गहरी दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है जिसका की PH मान 5.5 से 6.0 होना चाहिए

बैंगन की खेती के लिए अनुकूल जलवायु :-

बैंगन की खेती के लिए हमे ऐसी जलवायु की आवश्यकता होती है जो की ना तो बहुत आधिक गर्म हो और ना ही जलवायु में सुखापण हो बैंगन सम शीतोष्ण कही जाने वाली जलवायु में अच्छी तरह पैदावार करती है

बैंगन की खेती में खाद और उर्वरक :-

बैंगन की खेती के लिए खाद व उर्वरक की मात्रा का निर्धारण हम मिट्टी की जांच के आधार पर करते है एवंम सबसे पहले हम खेत को तैयार करते समय ही 25 से 30 टन गोबर की सड़ी हुयी खाद को अच्छी तरह से मिट्टी में मिला कर तेयार कर लेते है

इसके अलावा 370 किलो ग्राम सुपर फ़ॉस्फ़ेट, 200 किलो ग्राम यूरिया, और करीब 100 किलो ग्राम पोटेशियम सल्फ़ेट का इस्तेमाल करना चाहिए। जिसमे हमे सुपरफ़ॉस्फ़ेट तथा पौटेशियम सल्फ़ेट की जहा पूरी मात्रा को खेत में आखिरी बार तैयारी करते समय डालना होता है वही यूरिया की करीब एक तिहाई मात्रा का इस्तमाल किया जाता है

इसमें हमे बची हुयी यूरिया की मात्रा को दो बराबर हिस्सों में बाट कर जहा पहली खुराक को पौधे की रोपाई के 3 सप्ताह बाद और बची हुईं दूसरी मात्रा को पहली मात्रा देने के करीब चार सप्ताह बाद देना होता है

बैंगन की खेती कब करे :-

बैंगन की खेती के लिए नर्सरी तेयार कर खेती करने के लिए समय की बात की जाये तो नर्सरी में मई जून में करने पर इसकी बुआई 1 से डेढ़ माह में यानि जून या जुलाई में कर सकते है जो की पूरी तरह से अनुकूल समय है इसके अलावा हम यही कार्य नवम्बर और फ़रवरी में नर्सरी तेयार कर इसके 1 से से डेढ़ माह बाद बुवाई कर सकते है

बैंगन की रोपाई :-
बैंगन की बोआई के 1 से 1.5 महीनो के दौरान ही हमे इसके पौधो की रोपाई का काम शुरू कर देना है एवंम जब भी ये रोपाई का काम शुरू करना होता है उससे कुछ घंटो पहले ही हमे क्यारियों को अच्छी तरह पानी से भर देना है जिससे की पोधो को निकालने का कार्य आसान हो जाये इसके साथ ही हमे इस बात का भी भी ध्यान रखना है की जहा तक संभव हो सके ये कार्य हम शाम के समय ही करे और अच्छी पैदावार के लिए दो पौधों और दो कतार के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर रखना अच्छे परिणाम देता है
किट रोग और रोकथाम :-
बैंगन में लगने वाले विभिन्न तरह के किट रोग ना केवल पैदावार कम कर देते वरन ये लगने वाले फलो की गुणवत्ता को भी गिरा देते है अत: समय रहते हुए इन सभी कीटो की रोकथाम करना अति आवश्यक है

हरा तेला : इस रोग में किट पोधे का रस चूस कर सुखा देता इसके साथ ही पत्तियाँ का रंग पिला पड़ जाता है

सफेद मक्खी, हड्डा भुंडी, लाल अष्ट पदी मकड़ी, तना व फल छेदक सुंडी जैसे कई अन्य रोग है जो की धीरे धीरे फसलो को नुकसान पंहुचा कर बर्बाद कर देते है जिनकी रोग थाम के लिए हम करीब 400 मि.ली.मैलाथियान और 50 ई.सी. को 200 से 250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में करीब 15 दिन के अंतर पर छिड़काव करना चाहिए
निश्चय ही खेती बाड़ी में आधुनिक तकनीक और अच्छे बीजो का चयन कर कम लागत में भी अब हम बैंगन की खेती को भी अन्य फसलो की तरह ही मुनाफे की खेती के रूप में परिणाम पा सकते है

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