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ब्राह्मी बूटी मण्डूकपर्णी की खेती mandukaparni brahmi ki kheti

मंडूकपर्णी (ब्राह्मी ) की खेती  | gotu kola farming

ओषधीय पौधो की खेती  करना इन दिनों कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने  का सबसे उत्तम तरीका है इसी कड़ी में आज हम मंडूकपर्णी (ब्राह्मी ) की खेती  के बारे में जानेगे !
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जिसमे की हम ब्राह्मी का पौधा कैसा होता है!  ब्राह्मी का सेवन कैसे करे और इसके लिए जरुरी जानकारी आज हम जानेगे विस्तार से !

ब्राह्मी का पौधा कैसा होता है!

मेंढक के पंजों की तरह पत्तियां होने के कारण से मंडूकपर्णी के नाम से जाना जाता है आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में इसका प्रयोग प्राचीन समय से होता आ रहा  है  ये एक बहू वर्षीय शाकीय पौधा है जो कि संपूर्ण देश के जलाशयों के किनारे  होता है मंडूकपर्णी का प्रयोग मानसिक रोगों के उपचार और स्मरण शक्ति को तीव्र बनाने के लिए किया जाता है

mandukaparni vs brahmi
मंडूकपर्णी का प्रयोग प्रमुख रूप से तंत्रिका तंत्र मनोरोग पागलपन मिर्गी जैसे भयानक रोगों के उपचार हेतु प्रयोग किया जाता है महर्षि चरक के अनुसार मंडूकपर्णी मानसिक रोगों के उपचार की अचूक वनस्पति है इसे देश के कुछ राज्यों में  कहा जाता है ब्राह्मी कहा जाता है
ब्राह्मी का सेवन कैसे करे

ब्राह्मी के चूर्ण का सेवन अलग अलग रोगों में अलग अलग किया तरह से किया जाता है  बहुत आधिक मात्रा में इसका सेवन नुकसानदायक होता है अत: चिकित्सीय परामर्श लेकर ही हमेशा ब्राह्मी का सेवन करे

आइए दोस्तों अब बात कर लेते है मंडूकपर्णी की खेती कैसे करे


   mandukaparni brahmi ki kheti




मिट्टी -जलवायु यह ठंडी और आद्र जलवायु वाली फसल है इसकी खेती आंशिक छाया और पर्याप्त नमी वाले स्थानों पर की जा सकती है 5.0 से 7.5 पीएच वाली बलुई दोमट और  चिकनी मिट्टी में भी इसके पौधों की वृद्धि अच्छी होती है

भूमि की तैयारी- रोपाई पूर्व खेत को अच्छी तरह से जुताई कर के खरपतवार रहित कर लेना चाहिए खेत को समतल बनाकर उसकी जल निकासी व्यवस्था को भी ठीक कर ले



उन्नत प्रजातियां –मज्जापोशक काया कीर्ति लखनऊ लोकल 3 प्रजातियां केंद्रीय औषधीय सगंध पौधा संस्थान लखनऊ के द्वारा विकसित की गई है

प्रवधन-  इकट्ठा की गई लताओ कि 5 से 10 सेंटीमीटर लम्बी ऐसी शाखाये  जिन पर इंटरनोड और जड़े हो मंडूकपर्णी प्रवधन  के  लिए सर्वोत्तम होती मंडूकपर्णी का पौधा वर्षा ऋतु में अच्छा वनस्पति की वृद्धि करता है इसके बीच अत्यंत छोटे होते हैं जो अक्टूबर-नवंबर में प्राप्त होते है  बीज का अंकुरण बहुत कम होता है


मंडूकपर्णी की व्यवसायिक खेती  हेतु उपयुक्त शाखावो  की कटिंग अच्छे ढंग से तैयार की गई क्या रियो में 5 * 10 सेंटीमीटर की दूरी पर लगा कर के हल्की सिंचाई कर दी जाती है लगभग 1 सप्ताह से जड़े निकल जाती है तो 35 से 40 दिन में पौधरोपण योग्य तैयार हो जाते हैं
एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए लगभग 70 किलोग्राम अथवा 40,000 पौधे पर्याप्त होते हैं



खाद् उर्वरक-  नर्सरी से पौधों को उठाकर मुख्य खेत में 3 गुना 20 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपित  करें कटिंग की रोपाई सीधा खेत में की जा सकती है रोपाई का समय जून से लेकर अगस्त तक होता है रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करे


निराई गुड़ाई –खरपतवार रोपाई के 15 से 20 दिनों के बाद से ही लगभग 20 दिनों के अंतराल पर निराई गुड़ाई की आवश्यकता होती है मानसून के दिनों में खेत में खरपतवार नहीं होने चाहिए सर्दियों में निराई गुड़ाई करके निकाल दें!


उत्तर भारत के अधिक ठंडक वाले क्षेत्रों में इसकी परती फसल नहीं प्राप्त हो जाती है ऐसी स्थिति में पौधों को पूरा का पूरा उतार दिया जाता है कटाई के बाद 45 दिनों तक शाक को धूप में सुखाना  चाहिए सात से आठ 10 दिनों में से छाया में भली प्रकार सुखाकर इसका भंडारण किया जा सकता है

Admin:

View Comments (2)

  • bevkoof kyo banate ho paida karane me rog keet v market ke bare me bhi kuchh batayege

    1akar lagaye hai 18 maheene ho gaye hai 1 bar me 6 kuntal hi kat paya hu jot kar khatm kar doonga

  • hamne mandookparni laga rakhi hai lekin usase paidawar nahi le paye hai 1 sal ki fasal me kewal 1 kating huye hai badhwar nahi hote hai patti safed ho jati hai dawa dalne par kuchh asar hota hai fir waisee he ho jati hai upchar bataye