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Plastic mulching kya hai – प्लास्टिक मल्च (पलवार)क्या होता है कैसे लगाये क्या है प्लास्टिक मल्चिंग का खर्चा

Plastic mulching kya hai – प्लास्टिक मल्च (पलवार)क्या होता है कैसे लगाये क्या है प्लास्टिक मल्चिंग का खर्चा

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका खेती बागवानी डॉट कॉम में आज हम जानेगे Mulching farming method in hindi

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या Plastic mulching kya hai – प्लास्टिक मल्च (पलवार) (Plastic mulching) क्या होता है और कैसे लगाये और प्लास्टिक मल्चिंग लगाने में कितना खर्चा आता है

दोस्तों सबसे पहले हम बात कर लेते है plastic mulching in vegetables के प्लास्टिक मल्चिंग इतिहास के बारे में 1960 के दशक की शुरुआत से ही संयुक्त राज्य अमेरिका में व्यावसायिक रूप से सब्जियों का उत्पादन किया जाता आ रहा है। विभिन्न प्रकार की सब्जियों को प्लास्टिक मल्च का उपयोग करके सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। प्लास्टिक मल्च का उपयोग विशेष रूप से खरबूजा, टमाटर, हरी मिर्च, ककड़ी, कुम्हड़ा, बैंगन, तरबूज और भिंडी में किया जाता है। प्लास्टिक मल्च के उपयोग करने से, समय से पहले उत्पादन, उपज और फल की गुणवत्ता में सुधार होता है। प्लास्टिक मल्च का सबसे ज्यादा उपयोग उच्च मूल्य वाली सब्जी वर्गीय फसलों के उत्पादन में किया जाता है।

प्लास्टिक मल्चिंग क्या होता है Plastic Mulching meaning in hindi

प्लास्टिक मल्चिंग में Mulch Meaning in Hindi मल्च का हिंदी में मतलब होता है सब्जियों के सड़ने से बचाने के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण से ढका जाता है जो की वाष्पीकरण और मिट्टी का क्षरण को कम करने में मदद करता है इस तरह प्लास्टिक मल्चिंग खेत में लगे पौधों की जमीन को चारों तरफ से अच्छी तरह से प्लास्टिक फिल्म के द्वारा ढकने की प्रणाली को प्लास्टिक मल्चिंग कहते है।

Advantages of plastic mulching in agriculture – प्लास्टिक मल्चिंग  लगाने के लाभ

समय से पूर्व फसल काटना: प्लास्टिक मल्च का मिट्टी पर ग्रीनहाउस प्रभाव पड़ता है, प्लास्टिक मल्च के उपयोग से सबसे बड़ा फायदा यह है। रोपण प्यार में मिट्टी के तापमान में वृद्धि होती है, तेजी से फसलों का विकास होता है और जल्द ही रोपण शुरू करने में सक्षम बनाता है, जिसके कारण समय से पहले फसलों की कटाई की जा सकती है काले रंग के प्लास्टिक के उपयोग करने से 7-14 दिन पहले तक फसलों की कटाई की जा सकती है।

वाष्पीकरण को कम करता है: प्लास्टिक मल्च के उपयोग करने से मिट्टी और पानी दोनों का संरक्षण होता है इसका परिणाम यह होता है की मिट्टी की नमी अधिक समय तक बनी रहती है और सिंचाई करने पर पानी बहत ही कम लगता है। बिना प्लास्टिक मल्च की अपेक्षा में प्लास्टिक मल्च का योग करने से पौधों में वृद्धि दोगनी हो जाती है।

खरपतवार को नियंत्रित करता है: सूर्य के प्रकाश है। इन खरपतवार की वृद्धि में सहायता प्रदान करता है। प्लास्टिकमल्च की सहायता से सूर्य के प्रकाश में नियंत्रण पाया जा सकता है, प्लास्टिक मल्च सूर्य के प्रकाश को पौधो के चारो ओर मिट्टी तक पहुंचने नहीं देता है (जैसे की काला प्लास्टिक और कुछ अपारदर्शी प्लास्टिक, जैविक मिर्च की तुलना में प्रकाश को मिट्टी तक आने से रोकता है) और स्पष्ट प्लास्टिक एक अपवाद है जो सूर्य के प्रकाश को अंदर आने देता है। कम खरपतवारों की उपस्थिति में यांत्रिक खेती की आवश्यकता में कमी आती है।

उर्वरक निथारन को कम करता है: प्लास्टिक मल्च के माध्यम से पानी की अधिक मात्रा मिट्टी के अंदर नहीं जा पाती है, जिससे की पौधों को मिलने वाले पोषक तत्वों का नुकसान होना कम हो जाता है। क्योंकि मल्च इस अर्थ में प्रतिबंधात्मक है, इसलिए टपक सिंचाई विधि के साथ प्लास्टिक मल्च में इसका उपयोग करना सबसे अच्छा में तरीका है, टपक सिंचाई विधि में पानी और उर्वरक दोनों को सही मात्रा में मिला कर पौधों तक भेजा जाता है।

मिट्टी के संघनन को कम करता है: प्लास्टिक से मिट्टी को ढकने पर बारिश और धूप से होने वाले मिट्टी का संघनन कम हो जाता है। प्लास्टिक मल्चिंग के उपयोग से खरपतवार से की मात्रा में कमी होती है जिसके कारण यांत्रिक खेती में भी द कमी आती है। प्लास्टिक मल्च क्यारियों के बीच में खरपतवार नियंत्रण के लिए सीधे खरपतवार नाशक और यांत्रिक साधनों का प्रयोग किया जा सकता है। प्लास्टिक मल्च के कारण नीचे से के की मिट्टी में ढीलापन और वायु का अच्छी तरह से बातन होता की है। इससे मिट्टी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाली है और कि माइक्रोबियल गतिविधियों में सहायता मिलती है जिसके चलते पौधे के जड़ों के आसपास सक्रियता बनी रहती है।

जड़ों को होने वाली छती में कमी आती है: प्लास्टिक रहती है, जड़ों समय मिर्च के उपयोग से पौधे के आसपास एक व्यावहारिक रूप लागत में कम से खरपतवार मुक्त क्षेत्र बनता है जो प्लास्टिक की क्यारियों तीन उप बल्ब के बहुत बीच को छोड़कर अंतःखेती की आवश्यकता को दूर करता में मिट्टी है तथा अंतः काश है। खेती से जुड़ी समस्या को जड़ से खत्म करता के लिए इन कारकों के कारण, प्लास्टिक मल्च के उपयोग से पौधो मशीन एक के समग्र विकास में सुधार होता है।

गुणवत्ता युक्त उत्पादनः प्लास्टिक मल्च के उपयोग से फलों का सीधे मिट्टी के संपर्क में आने से फलों की पकने वाली समय कम हो जाती है फलों की सड़न कम होने के साथ-साथ फल और सब्जियों को साफ रखता है। इससे गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बेहतर विपणन क्षमता प्राप्त होती है।

मृदा अपरदन: आदर्श रूप से मिट्टी का कटाव 4 से 5 टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष से कम होना चाहिए। प्लास्टिक मिर्च के उपयोग से पानी के अपवाह और मृदा के कटाव में कमी आती है जिसके कारण मिट्टी की उपजाऊपन (ह्यूमस परत) को संरक्षित किया जा सकता है।

धूम्रीकरण प्लास्टिक मल्च मिट्टी के रासायनिक रसायन में के मूल प्रभाव को बढ़ाते हैं, क्योंकि प्लास्टिक मल्च अभेद्य प्रकृति का होता है, जिसके कारण गैसों का आदान प्रदान नई हो पाता है और मिट्टी में गैसीय रसायन को बना के रखता है। को कीट प्रबंधन रणनीतियों में सहायता करता है विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक मल्च का उपयोग करने से पौधों के आस पास कीटो का संक्रमण नहीं हो पाता है तथा मल्च कई प्रकार के कीट को प्रतिबिंबित करने में मदद भी करता है।

Disadvantages of plastic mulching in agriculture – प्लास्टिक मल्चिंग लगाने के नुकसान

प्लास्टिक मल्चिंग लगाने के फायदे तो बहुत है इसके साथ ही प्लास्टिक मल्चिंग लगाने के कुछ नुकसान भी है जिसमे सबसे बड़ा नुकसान है निष्कासन और निराकरण फसल होने के बाद प्लास्टिक नों मल्च को खेत से निकालना सबसे बड़ी समस्या है, विशेष रूप चे से काले रंग के प्लास्टिक को। शोध द्वारा इस समस्या को हल करने के लिए फोटो डिग्रेडेबल और बायोडिग्रेडेबल मल्च विकसित किया गया है।

बहुत उपयोग से प्रारंभ में बहुत अधिक पैसे खर्च होने की संभावना रहती है, प्लास्टिक मल्च के उपयोग से फसल उत्पादन की लागत में वृद्धि होती है। जैसे कुछ विशेष मशीन जिसमें दो से तीन उपकरण संलग्न होते हैं जैसे कि प्लास्टिक को क्यारियों में मिट्टी से दबाने के लिए उपकरण, प्लास्टिक मल्च को दबाने के लिए चक्के, पौधों को प्रत्यारोपण करने के लिए उपकरण मशीन के साथ जुड़े होते हैं। इस मशीन का उपयोग करने से लागत में वृद्धि होती है और समय भी कम लगता है।

प्लास्टिक मल्चिंग की लागत – Plastic mulching price

प्लास्टिक मल्चिंग लगाने के खर्चे या लगत plastic mulching cost की बात करे तो ये करीब करीब प्रति हेक्टेयर में मल्चिंग लगाने पर 30 से 35 हजार रुपए तक का खर्च होता है जो की सरकार द्वारा मिलने वाले अनुदान से 50 -55 फीसदी तक कम हो सकता है

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